खरी खरी कहनेवाले सच्चे और अच्छे कवि हैं कमला प्रसाद, साहित्य सम्मेलन में कवि के तीन पुस्तकों का हुआ लोकार्पण , आयोजित हुई काव्य-गोष्ठी…..

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खरी खरी कहनेवाले सच्चे और अच्छे कवि हैं कमला प्रसाद, साहित्य सम्मेलन में कवि के तीन पुस्तकों का हुआ लोकार्पण , आयोजित हुई काव्य-गोष्ठी…..

 

पटना डेस्क :- अपनी ओजस्वी वाणी और लेखनी से श्रोताओं का हृदय हर लेनेवाले मनस्वी साहित्यकार कमला प्रसाद खरी-खरी कहने वाले सच्चे और अच्छे कवि हैं। पत्थर होते इस समय में, कवि का मन अब भी कोमलकांत है और आज भी कविता बची हुई है, जीवित है और मरुथल में अमृत-जल बरसा रही है, कवि की लोकार्पित तीन काव्य-पुस्तकों में इसे समझा जा सकता है। इस दौर के समर्थ कवियों में अग़्र-पांक्तेय कवि कमला ज़िंदगी और ज़िंदा-दिली के कवि हैं।
यह बातें गुरुवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में कवि कमला प्रसाद के तीन काव्य-संग्रहों ‘पत्थर होते समय में’, ‘कवि का यह मन’ तथा ‘अब भी बची है कविता’ के लोकार्पण-समारोह की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। डा सुलभ ने कवि कमला को अत्यंत प्रतिभाशाली कवि बताते हुए, उनसे प्रबंध काव्य की अपेक्षा की।
समारोह का उद्घाटन करते हुए, बिहार गीत के रचनाकार एवं हिन्दी प्रगति समिति, बिहार के अध्यक्ष सत्य नारायण ने कहा कि कवि कमला प्रसाद एक बहुत बड़े सजग और सतर्क कवि हैं। छंद पर कवि का गहन अधिकार है। इन्होंने शिल्प को साधा है। इनमे कविता के प्रति अगाध निष्ठा है। संवेदना और सकारात्मकता इनकी रचनाओं की विशिष्टता है।
पुस्तक के लोकार्पण-कर्ता और नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो के सी सिन्हा ने कहा कि कविता व्यक्ति को तनावमुक्त करती है। गणित अथवा अन्य विषयों से जब विद्यार्थी अथवा आचार्य तनावग्रस्त हो जाते हैं, तो कविता उनके हृदय को सहलाकर उन्हें तनाव से दूर कर प्रसन्नचित करती और नवीन ऊर्जा का संचार करती है।
आयोजन के मुख्य अतिथि तथा मधेपुरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो अमरनाथ सिन्हा ने कहा कि अन्य लोग जो नहीं देख पाते, कवि उसे भी देख लेता है। आम आदमी संसार को तथा उसके विविध पक्षों को उस तरह से नहीं देख सकता, जिस दृष्टि से एक कवि देखता है। इसीलिए कवि महान है। कवि कमला के भीतर एक तीव्र आवेग है।
मंत्रिमण्डल सचिवालय विभाग में विशेष सचिव रहे वरिष्ठ कवि डा उपेंद्रनाथ पाण्डेय ने कहा कि कवि कमला प्रसाद की विशेषता यह है कि इन्होंने अपनी रचनाओं में खाँटी भारतीय परंपरा के प्रतीक और विंब लिए हैं। इनकी कविताओं में लोक-मंगल का उदात्त भाव है।
वीर कुँवर सिंह विश्व विद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो रणविजय कुमार, सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद, डा मधु वर्मा, वरिष्ठ कवि भगवती प्रसाद द्विवेदी, अरुण शाद्वल, अभिजीत कश्यप, पं यज्ञनाथ तिवारी ने भी पुस्तक पर अपने विचार रखते हुए, कवि को शुभकामनाएँ दी।
कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए, लोकार्पित पुस्तक के कवि कमला प्रसाद ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया। इस अवसर पर एक भव्य कवि-सम्मेलन का भी आयोजन हुआ, जिसमें वरिष्ठ कवयित्री आराधना प्रसाद, बच्चा ठाकुर, आचार्य विजय गुंजन, ओम् प्रकाश पाण्डेय’प्रकाश’, शमा कौसर ‘शमा’, डा रमाकान्त पाण्डेय, डा मेहता नगेंद्र सिंह, डा शालिनी पाण्डेय, मधुरेश नारायण, डा अर्चना त्रिपाठी, छाया मिश्रा, जय प्रकाश पुजारी, डा वीणा कुमारी, सिद्धेश्वर, डा ब्रह्मानंद पाण्डेय, कमल किशोर ‘कमल’, डा सुषमा कुमारी, अर्जुन प्रसाद सिंह, नरेंद्र कुमार लाल मोहन प्रसाद, अभय कुमार, श्याम बिहारी प्रभाकर, श्रीकांत व्यास,अरुण कुमार श्रीवास्तव,रत्नावली कुमारी, ने अपनी रचनाओं के मधुर पाठ से बीती संध्या तक सम्मेलन परिसर को गुंजाएमान रखा। मंच का संचालन सुनील कुमार दूबे ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।
इस अवसर पर, डा ओम् प्रकाश जमुआर, अम्बरीष कांत, नरेंद्र कुमार झा, परवेज़ आलम, डा रणजीत कुमार, बाँके बिहारी साव, डा विजय कुमार दिवाकर, ज्योति प्रकाश, रंजना प्रसाद, चंद्रशेखर आज़ाद, मीना सहाय शिवानंद गिरि समेत बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

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